RBI New CIBIL Score Rules for Loan on EMI
RBI के नए सिबिल स्कोर (CIBIL Score) नियम किसी भी प्रकार की लॉन लेने के लिए: जानिए पूरी जानकारी
2025 में भारतीय रिज़र्व बैंक(RBI) ने क्रेडिट रिपोर्टिंग और CIBIL स्कोर से जुड़ी कई महत्वपूर्ण नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन बदलावों का उद्देश्य वित्तिय पारदर्शिता बढ़ाना, उधार- दाताओं और उधार कर्ताओं के बीच विश्वास सुधारना, और क्रेडिट सिस्टम को को अधिक जवाबदेह बनाना है। आइए जाने ये नए नियम क्या हैं, उनमें कैसे आप प्रभावित हो सकते हैं, और किस तरह इनका फायदा उठाया जा सकता है लॉन लेने पर।
नए नियम — मुख्य बिंदु
1.15 दिन में CIBIL स्कोर अपडेट: सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब बैंक और NBFC( गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं) अपने ग्राहकों का क्रेडिट डेटा हर 15 दिन में क्रेडिट ब्यूरो(जैसे CIBIL) को रिपोर्ट करेंगे।
इसका मतलब यह है कि आपकी वित्तीय गतिविधिया जैसे लोन का भुगतान,EMI चुकाना, क्रेडिट कार्ड बिल देना –बहुत जल्दी आपके स्कोर में परिलक्षित होंगी।
2. क्रेडिट रिर्पोट पर नोटिफिकेशन: जब भी कोई वित्तिय संस्था आपकी क्रेडिट रिपोर्ट करती है(उदाहरण के लिए जब आप लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते हैं) ,तो आपको एसएमएस या ईमेल के जरिय सूचना दी जाएगी। यह कदम सुरक्षा बढ़ाने और अनधीकृत जांचों को रोकने में मदद करेगा।
3.गलतियों का तेज निपटारा: यदि आपके क्रेडिट रिपोर्ट में कोई त्रुटि है – जैसे देरी का गलत रिर्पोट होना- तो शिकायत प्रक्रिया अब तेज होगी। कुछ स्रोतों के अनुसार ब्यूरो या बैंक को त्रुटि सुधार के लिए 21दिन का समय दिया गया है। इसके अलावा यदि शिकायत न सुलझे तो इस देरी के लिए ₹100 प्रतिदिन जैसा जुर्माना भी लग सकता है।
4. पहली बार उधार लेने वालों(first time borrower) के लिए बेहतर विकल्प RBI की नई गाइडलाइंस में कहा गया है कि पहली बार लोन लेने वालों के लिए CIBIL स्कोर अनिवार्य नहीं रहेगा । इस कदम से वित्तिय समावेशन बढ़ेगा, क्योंकि जिन लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री बहुत कम या बिल्कुल नहीं है, उनके लिए लोन हासिल करना आसान हो जाएगा।
5.मुक्त क्रेडिट रिपोर्ट की पहुंच: अब हर व्यक्ति को कम से कम एक बार मुफ्त में अपनी क्रेडिट रिपोर्ट देख पाने का अधिकार होगा। इससे लोग अपनी रिपोर्ट नियमित रूप से जांच सकते हैं, किसी भी इंक्वायरी या गलत रिर्पोट को तुरन्त देख कर सुधार करवा सकते हैं।
,6. मानकीकृत रिपोर्टिंग फॉर्मेट: सभी उधार दाताओं(बैंकों,NBFCs) को अब एक यूनिफार्म डेटा फॉर्मेट में क्रेडिट डेटा रिपोर्ट करना होगा, ताकि क्रेडिट ब्यूरो में डाटा अधिक सुसंगत और विश्वसनीय हो। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पूरी तरह से और सही तरीके से दर्ज़ हो, और स्कोरिंग मॉडल में भिन्नता कम हो।
7.स्पष्ट कारण देना अनिवार्य: जब कोई लोन या क्रेडिट कार्ड आवेदन रिजेक्ट किया जाता है, तो बैंक को रिस्क के कारणों को साफ साफ बताना होगा। सिर्फ ” स्कोर कम है” जैसी सामान्य बाते कहना अब पर्याप्त नहीं होगा। यह पारदर्शिता ग्राहकों को यह समझने में मदद करती है कि वे अपनी स्कोर को बेहतर कैसे बना सकते हैं।
√ इन नियमों का महत्व — फायदे
• तेजी से रिफ्लेक्शन: चूंकि स्कोर अपडेट हर 15 दिन में होगा, आपका अच्छा या बुरा क्रेडिट बिहेवियर बहुत जल्दी दिखेगा। यह आपको तुरंत सुधार करने या लाभ पाने का मौका देता है।
• बेहतर पारदर्शिता: नोटिफिकेशन सिस्टम और स्पष्ट कारण बताए जाने से, ग्राहक जान पाते हैं कि कब और किसने उनकी रिपोर्ट चेक की, और लोन अस्वीकृत हुआ।
• उच्च वित्तीय समावेशन: पहली बार लोन लेने वालों के लिए स्कोर अनिवार्यता हटने से अधिक लोगों को लोन लेने का अवसर मिलेगा, खासकर वे जिनकी अभी क्रेडिट हिस्ट्री कम है।
• शिकायत समाधान जल्द होना: गलतियों की रिपोर्ट और उन्हें ठीक कराने का प्रॉसेस तेज होने से स्कोर में सुधार करना सरल होगा।
•विश्वसनीय डेटा : मानकीकृत रिपोर्टिंग से ब्यूरो में डाटा की सटीकता बढ़ेगी और स्कोरिंग में भिन्नता कम होगी, जिससे सभी उपयोगकर्ताओं को समान रूप से न्याय मिलेगा।



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