Market outlook : 23200 के नीचे गिरा निफ्टी, जानिए 16 मार्च को कैसी रह सकती है बाजार की चाल
भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में दबाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक 23,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे बंद हुआ। इससे निवेशकों के बीच थोड़ी चिंता बढ़ गई है कि आने वाले कारोबारी दिन यानी 16 मार्च को बाजार की दिशा कैसी रह सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार फिलहाल ग्लोबल संकेतों, एफआईआई (Foreign Institutional Investors) की गतिविधियों और घरेलू आर्थिक संकेतकों से प्रभावित हो रहा है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार की चाल को समझकर ही निवेश करना चाहिए।
बाजार में क्यों आई गिरावट?
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। आईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों में कमजोरी के कारण 23,200 के स्तर से नीचे आ गया। इसके साथ ही में भी गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:
1. वैश्विक बाजारों का दबाव
अमेरिका और यूरोप के बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। विदेशी निवेशक ऐसे समय में अक्सर उभरते बाजारों से पैसा निकालते हैं।
2. एफआईआई की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है। जब बड़े निवेशक बिकवाली करते हैं तो बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है।
3. मुनाफावसूली (Profit Booking)
पिछले कुछ समय में बाजार में अच्छी तेजी आई थी, इसलिए कई निवेशकों ने मुनाफा बुक किया। इससे भी बाजार नीचे आया।
23,200 का स्तर क्यों है महत्वपूर्ण?
टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार 23,200 का स्तर के लिए एक अहम सपोर्ट माना जा रहा था। इस स्तर के नीचे बंद होना यह संकेत देता है कि बाजार में थोड़ी कमजोरी बनी रह सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी जल्दी ही इस स्तर को दोबारा पार कर लेता है तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।
टेक्निकल चार्ट के अनुसार प्रमुख स्तर इस प्रकार हैं:
- सपोर्ट: 22,900 – 22,700
- रेजिस्टेंस: 23,300 – 23,500
यदि निफ्टी 22,900 के नीचे जाता है तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
16 मार्च को कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार आने वाले कारोबारी दिन में बाजार थोड़ा सतर्क रह सकता है। यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी रिकवरी देखने को मिल सकती है।
संभावित स्थिति:
1. हल्की गिरावट के साथ शुरुआत
संभावना है कि बाजार की शुरुआत हल्की कमजोरी के साथ हो सकती है।
2. दिन में रिकवरी की संभावना
यदि बैंकिंग और आईटी सेक्टर में खरीदारी आती है तो बाजार दिन के दौरान संभल सकता है।
3. सीमित दायरे में कारोबार
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार फिलहाल एक सीमित रेंज में ट्रेड कर सकता है।
किन सेक्टरों पर रहेगी नजर?
आने वाले सत्र में निवेशकों की नजर कुछ खास सेक्टरों पर रहेगी।
1. बैंकिंग सेक्टर
बैंकिंग शेयरों का बाजार में बड़ा वेटेज होता है। यदि बैंकिंग स्टॉक्स में तेजी आती है तो बाजार को सहारा मिल सकता है।
2. आईटी सेक्टर
ग्लोबल संकेतों के कारण आईटी शेयरों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। डॉलर की चाल भी इन शेयरों को प्रभावित करती है।
3. मेटल और ऑटो सेक्टर
कमोडिटी कीमतों और वैश्विक मांग के आधार पर इन सेक्टरों में मूवमेंट देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशकों को समझदारी से कदम उठाने की जरूरत होती है।
1. घबराकर बिक्री न करें
थोड़ी गिरावट आने पर तुरंत शेयर बेच देना सही रणनीति नहीं होती।
2. मजबूत कंपनियों पर फोकस रखें
लंबी अवधि के निवेश के लिए मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों को चुनना बेहतर होता है।
3. SIP और लंबी अवधि का नजरिया अपनाएं
म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश करना जोखिम को कम कर सकता है।
4. स्टॉप लॉस जरूर लगाएं
शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस लगाना बेहद जरूरी है।
घरेलू और वैश्विक संकेत भी करेंगे असर
भारतीय शेयर बाजार सिर्फ घरेलू कारकों से नहीं बल्कि वैश्विक घटनाओं से भी प्रभावित होता है।
कुछ प्रमुख फैक्टर:
- अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेत
- कच्चे तेल की कीमत
- डॉलर इंडेक्स
- विदेशी निवेशकों का निवेश
इन सभी संकेतों का असर आने वाले कारोबारी सत्र में बाजार की दिशा तय कर सकता है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर
हालांकि बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर मानते हैं।
जब बाजार में गिरावट आती है तो अच्छी कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल सकते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे निवेश करना फायदेमंद हो सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर का 23,200 के नीचे जाना बाजार में थोड़ी कमजोरी का संकेत जरूर देता है, लेकिन अभी घबराने की जरूरत नहीं है। यदि बाजार इस स्तर को दोबारा पार कर लेता है तो तेजी वापस लौट सकती है।
16 मार्च को बाजार की चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों, एफआईआई की गतिविधियों और प्रमुख सेक्टरों की चाल पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर बाजार पर नजर बनाए रखनी चाहिए और सोच-समझकर निवेश के फैसले लेने चाहिए।
