म्यूचुअल फंड से पैसे निकालने की सोच रहे हैं? समझ लें FIFO मेथड का गणित, टैक्स को लेकर दूर हो जाएगा कंफ्यूजन!

अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और अब पैसे निकालने (रिडेम्प्शन) की योजना बना रहे हैं, तो एक शब्द आपको ज़रूर समझ लेना चाहिए—FIFO Method। यही वह नियम है, जो यह तय करता है कि आपके निकाले गए पैसे पर कितना टैक्स लगेगा। अक्सर निवेशक यहीं कंफ्यूज हो जाते हैं कि टैक्स कैसे कैलकुलेट होगा, कौन-सी यूनिट्स बिकी मानी जाएंगी और कैपिटल गेन शॉर्ट टर्म होगा या लॉन्ग टर्म।

इस लेख में हम FIFO मेथड को आसान भाषा और उदाहरणों के साथ समझेंगे, ताकि म्यूचुअल फंड से पैसे निकालते समय टैक्स को लेकर कोई भ्रम न रहे।

FIFO मेथड क्या है? (What is FIFO Method)

FIFO का पूरा नाम है First In, First Out।इसका सीधा मतलब है—

👉 आपने म्यूचुअल फंड में जो यूनिट्स सबसे पहले खरीदी थीं, रिडेम्प्शन के समय सबसे पहले वही बेची हुई मानी जाएंगी।भले ही आप बाद में कई बार निवेश कर चुके हों या SIP के जरिए हर महीने पैसा लगाया हो, लेकिन जब आप पैसा निकालते हैं, तो टैक्स की गणना सबसे पुरानी यूनिट्स से शुरू होती है।

👉 FIFO नियम सभी इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड्स पर लागू होता है।

FIFO मेथड क्यों जरूरी है?

FIFO मेथड इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे यह तय होता है कि—आपका कैपिटल गेन शॉर्ट टर्म (STCG) है या

लॉन्ग टर्म (LTCG)और इसी के आधार पर आपका टैक्स रेट तय होता है।अगर FIFO नहीं होता, तो निवेशक टैक्स बचाने के लिए मनचाही यूनिट्स बेच सकते थे, जिससे टैक्स सिस्टम में गड़बड़ी हो जाती।

इक्विटी म्यूचुअल फंड में टैक्स और FIFO

1️⃣ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)होल्डिंग पीरियड:

1 साल से कमटैक्स: 15%

2️⃣ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)होल्डिंग पीरियड:

1 साल से ज्यादा₹1 लाख तक: कोई टैक्स नहीं₹1 लाख से ज्यादा: 10% टैक्स (बिना इंडेक्सेशन)FIFO यह तय करता है कि आपकी बेची गई यूनिट्स 1 साल से ज्यादा पुरानी हैं या नहीं।

FIFO मेथड को उदाहरण से समझें:-

मान लीजिए आपने एक इक्विटी म्यूचुअल फंड में ये निवेश किए—जनवरी 2023: ₹1,00,000जुलाई 2023: ₹1,00,000जनवरी 2024: ₹1,00,000अब जनवरी 2026 में आपने ₹1,50,000 निकालने का फैसला किया।

FIFO के अनुसार क्या होगा?

•सबसे पहले जनवरी 2023 वाला निवेश बिकेगा

•फिर जरूरत पड़ने पर जुलाई 2023 वाला निवेश

•यानि भले ही आपने 2024 में भी निवेश किया हो, लेकिन टैक्स की गणना पुराने निवेश से होगी।

👉 चूंकि जनवरी 2023 वाला निवेश 1 साल से ज्यादा पुराना है, इसलिए यह LTCG में आएगा और ₹1 लाख तक का गेन टैक्स फ्री होगा।

SIP निवेशकों के लिए FIFO क्यों ज्यादा अहम है?

SIP में हर महीने नई यूनिट्स खरीदी जाती हैं।इसका मतलब है—हर SIP की अलग खरीद तारीख

हर SIP का अलग टैक्स कैलकुलेशनजब आप SIP से पैसा निकालते हैं, तो FIFO के हिसाब से—सबसे पुरानी SIP यूनिट्स पहले बिकती हैं और नई SIP यूनिट्स बाद में

यही कारण है कि SIP निवेशकों को अक्सर टैक्स स्टेटमेंट देखकर हैरानी होती है।डेट म्यूचुअल फंड और FIFOडेट फंड्स में भी FIFO लागू होता है, लेकिन टैक्स नियम अलग हैं।डेट फंड टैक्स (नए नियम)अब डेट फंड से होने वाला गेन

👉 आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता हैहोल्डिंग पीरियड से फर्क नहीं पड़ता (कुछ पुराने निवेशों को छोड़कर)FIFO यहां भी यह तय करता है कि कौन-सी यूनिट्स पहले रिडीम हुईं।

FIFO से जुड़े कुछ आम भ्रम

भ्रम 1: मैं नई यूनिट्स बेच सकता हूं👉 सच्चाई: आप यह नहीं चुन सकते। FIFO अपने आप लागू होता है।

भ्रम 2: पूरा अमाउंट एक ही टैक्स रेट पर टैक्सेबल होगा👉 सच्चाई: एक ही रिडेम्प्शन मेंकुछ यूनिट्स LTCGकुछ STCGहो सकती हैं।

भ्रम 3: टैक्स AMC काट लेती है

👉 सच्चाई: म्यूचुअल फंड हाउस टैक्स नहीं काटता (TDS नहीं), टैक्स आपको खुद रिटर्न में भरना होता है।

FIFO को ध्यान में रखकर टैक्स कैसे बचाएं?

1️⃣ 1 साल पूरा होने का इंतजार करें

•इक्विटी फंड में 1 साल पूरा होने पर LTCG टैक्स कम हो जाता है।

2️⃣ ₹1 लाख की LTCG लिमिट का इस्तेमाल करें

•हर साल ₹1 लाख तक का गेन टैक्स फ्री निकाल सकते हैं।

3️⃣ स्टेप-बाय-स्टेप रिडेम्प्शन करेंएक साथ बड़ा अमाउंट निकालने के बजाय, चरणों में निकालें।

4️⃣ टैक्स रिपोर्ट जरूर चेक करें

•CAS (Consolidated Account Statement) से साफ पता चलता है कि कौन-सी यूनिट्स बिकी हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

म्यूचुअल फंड से पैसा निकालते समय FIFO मेथड को समझना बेहद जरूरी है।यह न सिर्फ यह तय करता है कि आपकी कौन-सी यूनिट्स बिकी मानी जाएंगी, बल्कि यह भी तय करता है कि—आपका टैक्स कितना लगेगा

कैपिटल गेन शॉर्ट टर्म होगा या लॉन्ग टर्मअगर आप पहले से FIFO को ध्यान में रखकर प्लानिंग करते हैं, तो टैक्स का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए अगली बार म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने से पहले FIFO का गणित जरूर समझ लें—ताकि बाद में कोई टैक्स सरप्राइज न मिले।

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