नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ का पैसा निकाले या नहीं? जानें आपको कब तक मिलता रहेगा ब्याज
यह सवाल आज लाखों नौकरीपेशा लोगों के मन में आता है कि नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ (Provident Fund) का पैसा तुरंत निकाल लेना चाहिए या उसे खाते में ही रहने देना चाहिए? साथ ही सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यह भी रहता है कि पीएफ पर ब्याज कब तक मिलता है और कब बंद हो जाता है?
अगर आप भी नौकरी बदल चुके हैं, ब्रेक पर हैं या भविष्य की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद काम का है। आइए, आसान भाषा में पूरे नियम और समझदारी भरे फैसले को समझते हैं।
पीएफ क्या है और क्यों है इतना जरूरी?
पीएफ यानी Employees’ Provident Fund (EPF) एक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता (Employer) दोनों हर महीने योगदान करते हैं।
इसका मकसद है –
रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा
टैक्स सेविंग
लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा
यही वजह है कि पीएफ को “जबरन बचत” (Forced Saving) भी कहा जाता है।
नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं या नहीं?
हां, निकाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें होती हैं।
1️⃣ कब निकाल सकते हैं पूरा पीएफ?
अगर आप लगातार 2 महीने तक बेरोजगार रहते हैं, तो आप अपना पूरा पीएफ निकाल सकते हैं।
1 महीने बाद: सिर्फ कर्मचारी का योगदान
2 महीने बाद: कर्मचारी + नियोक्ता का पूरा योगदान
क्या नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकालना सही रहता है?
अक्सर लोग नौकरी बदलते ही पीएफ निकाल लेते हैं, लेकिन यह हमेशा सही फैसला नहीं होता।
पीएफ निकालने के नुकसान
रिटायरमेंट के लिए बनाई गई बचत टूट जाती है
कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा खत्म हो जाता है
टैक्स देना पड़ सकता है
भविष्य में वित्तीय सुरक्षा कमजोर हो जाती है
✅ सही तरीका क्या है?
अगर आप नई नौकरी में जा रहे हैं, तो पीएफ ट्रांसफर कराना सबसे बेहतर विकल्प है, न कि निकालना।
नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ पर ब्याज कब तक मिलता है?
यह सबसे अहम सवाल है 👇
📌 पीएफ पर ब्याज मिलता है:
नौकरी छोड़ने के बाद लगातार 3 साल तक
बशर्ते आपका पीएफ खाता इनऑपरेटिव (Inactive) न हो
EPFO के नियमों के अनुसार, अगर कोई योगदान नहीं हो रहा है, तब भी 3 साल तक ब्याज मिलता रहता है।
इनऑपरेटिव पीएफ खाता क्या होता है?
अगर
आपने नौकरी छोड़ दी
3 साल तक कोई योगदान नहीं हुआ
और न ही आपने पैसा निकाला
तो पीएफ खाता Inoperative हो जाता है।
👉 इनऑपरेटिव खाते पर ब्याज नहीं मिलता।
पीएफ का पैसा निकालें या छोड़ दें – कब क्या करें?
✅ पीएफ न निकालें, अगर:
आप नौकरी बदल रहे हैं
भविष्य में फिर से नौकरी करने का प्लान है
रिटायरमेंट की प्लानिंग कर रहे हैं
तुरंत पैसों की जरूरत नहीं है
❌ पीएफ निकाल सकते हैं, अगर:
लंबे समय तक बेरोजगार रहने वाले हैं
खुद का बिजनेस शुरू कर रहे हैं
मेडिकल या इमरजेंसी जरूरत है
दोबारा नौकरी करने का कोई प्लान नहीं
टैक्स का क्या नियमहै ?
यह बहुत जरूरी पॉइंट है
🔹 5 साल से कम नौकरी करने पर:
अगर आपकी कुल नौकरी (सभी कंपनियों को मिलाकर) 5 साल से कम है और आप पीएफ निकालते हैं, तो:
पीएफ पर टैक्स लग सकता है
TDS कट सकता है (अगर राशि ₹50,000 से ज्यादा है)
🔹 5 साल या उससे ज्यादा नौकरी पर:
पीएफ निकालना पूरी तरह टैक्स फ्री होता है
क्या पीएफ निकालने के बजाय कुछ और कर सकते हैं?
बिल्कुल कर सकते हैं
पीएफ ट्रांसफर
नई नौकरी में UAN के जरिए पीएफ ट्रांसफर करना सबसे स्मार्ट फैसला है।
इससे:
पुराना पैसा सुरक्षित रहता है
ब्याज मिलता रहता है
रिटायरमेंट कॉर्पस मजबूत होता है
पीएफ पर ब्याज दर कितनी है?
हर साल EPFO ब्याज दर घोषित करता है।
आमतौर पर यह 8% से 8.5% के आसपास रहती है, जो कि बैंक FD से बेहतर मानी जाती है।
समझदारी भरा फैसला कैसे लें?
खुद से ये सवाल पूछिए:
क्या मुझे अभी पैसों की सख्त जरूरत है?
क्या मैं भविष्य में नौकरी करूंगा?
क्या मैं टैक्स देना चाहता हूं?
क्या मेरी रिटायरमेंट प्लानिंग सही दिशा में है?
अगर जवाब “नहीं” है, तो पीएफ निकालना जल्दबाजी हो सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
👉 नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकालना विकल्प जरूर है, लेकिन समझदारी हमेशा नहीं।
👉 पीएफ पर 3 साल तक ब्याज मिलता रहता है, इसलिए घबराकर तुरंत पैसा निकालने की जरूरत नहीं।
👉 अगर नई नौकरी मिल रही है, तो पीएफ ट्रांसफर सबसे बेहतर और सुरक्षित तरीका है।
याद रखें, पीएफ सिर्फ एक अकाउंट नहीं, बल्कि आपके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की नींव है।
इसलिए फैसला भावनाओं में नहीं, जानकारी के साथ लें
