RBI KCC Changes: किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम में होने जा रहे बड़े बदलाव, मिलेंगे क्या-क्या फायदे? पूरी डिटेल

भारतीय कृषि क्षेत्र को सशक्त, समर्पित और भविष्य-तय विकास के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना में बड़े नए बदलावों के मसौदा निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य इस योजना को और अधिक किसानों की वास्तविक ज़रूरतों के अनुरूप, लचीला और आधुनिक बैंकिंग-अनुकूल बनाना है।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC) आज भारत के करोड़ों किसानों के लिए पूंजी, बीज, उर्वरक, कृषि मशीनरी, खेती-बाड़ी से जुड़ी अन्य खर्चों और उत्पादन लागत के लिए एक प्रमुख वित्तीय साधन बन चुकी है। लेकिन अब RBI के नए प्रस्तावित बदलाव इसे और भी अधिक प्रभावी और किसान-हितैषी बनायेंगे।

KCC में प्रस्तावित मुख्य बदलाव (ड्राफ्ट गाइडलाइंस)

1. लोन अवधि अब 6 साल तक! अब तक KCC ऋण की अवधि (Tenure) मुख्यतः 1-5 वर्षों में सीमित थी, जिससे किसानों को हर साल उधार लेकर चक्र चलाना पड़ता था। नए प्रस्ताव के तहत:

➡️ ऋण की अवधी को 6 वर्ष तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, ताकि किसानों को फसल चक्र और लोन चक्र के बीच संतुलन मिल सके।

➡️ लघु अवधि वाली फसलें → 12 महीने, दीर्घ अवधि वाली फसलें → 18 महीने का समय मिले ऐसा मानकीकरण भी प्रस्तावित है।

•यह बदलाव किसानों को लोन का बोझ साल-ब-साल झेलने की बजाय फसल चक्र के अनुरूप संतुलित करने में मदद देगा।

2. क्रॉप-वाइज लोन सीमा: वास्तविक लागत के हिसाब से

•अब तक किसानों को लोन राशि तय करने में अक्सर पूर्वानुमानित सीमा लागू होती थी, जो कभी-कभी उनके खर्चों को पूरा नहीं करती थी।

प्रस्ताव है कि लोन की सीमा को फसल-फसल के वास्तविक लागत (Scale of Finance) के हिसाब से तय किया जाए, ताकि किसान को खेती की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त धन मिल सके।

➡️ इसका मतलब है कि आपको कम ब्याज, पर्याप्त लोन और वास्तविक ज़रूरत के अनुसार सहायता मिलेगी।

3. Collateral (जमानत)-नियम में नरमी

यह बदलाव खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत बड़ा फायदा है।

👉 RBI draft में यह प्रस्ताव है कि ₹2 लाख तक के कृषि और सम्बंधित गतिविधियों के लोन पर जमानत (Collateral) की आवश्यकता न रखी जाए।

➡️ इससे किसान को किसी जमीनी संपत्ति या संसाधन को गिरवी रखे बिना आसानी से लोन मिल सकेगा, जिससे जोखिम भी कम होगा।

4. कृषि-तकनीक और नवाचार खर्च भी मान्य!

•आज खेती सिर्फ खेत और बीज तक सीमित नहीं है। नए ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि मृदा परीक्षण, मौसम पूर्वानुमान सेवाएँ, जैविक/आधुनिक कृषि प्रमाणन जैसे तकनीकी खर्च भी लोन के दायरे में शामिल हों।

➡️ ये खर्च अब किसान के कुल लोन का 20% अतिरिक्त घटक मान्य होगा।

5. Flexi KCC सीमाएँ (Marginal Farmers के लिए)

•विशेष रूप से सीमांत किसानों (1 हेक्टेयर तक भूमि वाले) के लिए प्रस्ताव है:

➡️ ₹10,000 से ₹50,000 तक के लचीले (Flexi) लोन लिमिट,

➡️ जो भूमि-धारक, फसल की प्रकृति और बैंक द्वारा मूल्यांकन के आधार पर तय होंगे।

यह कदम बढ़ते खर्चों और बदलते मौसम/ताज़ा कृषि टेक्नोलॉजी की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

इन बदलावों से किसानों को क्या-क्या फायदे होंगे?

✔️ आसान क्रेडिट (Credit) उपलब्धता:

लोन अवधि बढ़ाए जाने और कैलिब्रेटेड ड्रॉइंग लिमिट से किसान आसानी से अपनी खेती की ज़रूरतों के लिए ज़्यादा भरोसेमंद लोन पा सकेंगे।

✔️ जमानत-मुक्त लोन (Collateral Free):

-₹2 लाख तक के लोन पर कोई जमानत नहीं! विशेषकर सीमांत किसानों के लिए यह एक गुणात्मक बदलाव है।

✔️ तकनीकी और आधुनिक खेती का समर्थनमृदा-परीक्षण, मौसम पूर्वानुमान और आधुनिक प्रमाणन जैसे खर्च अब मान्य होने से हम सस्टेनेबल और लाभकारी खेती को बढ़ावा दे सकेंगे।

✔️ सरल और सुव्यवस्थित प्रक्रियामानकीकृत फसल अवधि, बैंक उपचार, डिजिटल शोषण और तकनीकी समर्थन से प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और किसान-हित रणनीति वाली हो जाएगी।

क्या अभी सब फाइनल हो चुका है?

नहीं! RBI ने ये बदलाव ड्राफ्ट (प्रारूप) के रूप में जारी किए हैं और साझा सुझाव (Stakeholder Feedback) आमंत्रित किए हैं, जो 6 मार्च 2026 तक मांगे जा रहे हैं।

भावी बदलावों में इन सुझावों के आधार पर कुछ नियम और संशोधित भी हो सकते हैं।

निष्कर्ष

RBI द्वारा KCC स्कीम में प्रस्तावित बदलाव किसान के हित में एक बड़ी और प्रगतिशील पहलकदमी हैं।

➡️ ज्यादा लोन, कम जमानत, तकनीकी-खर्च समर्थन, लचीला ड्रा लिमिट और लंबी अवधि — ये बदलाव किसानों को आत्मनिर्भर, सशक्त और आधुनिक कृषि-उद्योग में पूरी भागीदारी दिलाएंगे।

कुल मिलाकर यह कदम भारत के कृषि क्षेत्र को नई गति, अधिक वित्तीय मूल्या और उन्नत तकनीक के साथ आगे ले जाएगा।

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