मूंगफली की खेती कैसे होती है, बुवाई का सही समय क्या है? बीज से लेकर फसल की कटाई तक… जानें सबकुछ
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की खेती भारत में किसानों के लिए एक लाभदायक और कम लागत वाली फसल मानी जाती है। इसे “गरीबों का बादाम” भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन, तेल और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। सही तकनीक, समय पर बुवाई और उचित देखभाल से किसान मूंगफली की खेती से अच्छा उत्पादन और मुनाफा कमा सकते हैं। आइए जानते हैं बीज चयन से लेकर कटाई तक की पूरी जानकारी आसान भाषा में।
उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
मूंगफली की फसल गर्म और हल्की नमी वाली जलवायु में अच्छी होती है। इसकी खेती के लिए 20°C से 30°C तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। अधिक ठंड या पाला फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।मिट्टी की बात करें तो हल्की दोमट, बलुई दोमट या अच्छी जल निकास वाली भूमि सबसे बेहतर रहती है। पानी का ठहराव मूंगफली के लिए हानिकारक होता है, इसलिए खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है। मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
बुवाई का सही समय
मूंगफली की खेती मुख्यतः खरीफ और रबी सीजन में की जाती है:
•खरीफ फसल: जून से जुलाई (मानसून की शुरुआत के साथ)
•रबी फसल: अक्टूबर से नवंबर (जहां सिंचाई की सुविधा हो)
•खरीफ सीजन में बारिश के साथ बुवाई करने से अंकुरण अच्छा होता है और पैदावार भी बेहतर मिलती है।
बीज का चयन और मात्रा
अच्छी पैदावार के लिए प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीज का चयन बेहद जरूरी है। जैसे – GG-20, TG-37A, JL-24, और R-8808 जैसी किस्में किसानों में लोकप्रिय हैं।बीज की मात्रा:छोटे दाने वाली किस्मों के लिए 80–100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयरबड़े दाने वाली किस्मों के लिए 100–120 किलोग्राम प्रति हेक्टेयरबुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक दवा (थायरम या कार्बेन्डाजिम) से उपचारित करना चाहिए ताकि रोगों से बचाव हो सके।
खेत की तैयारी और बुवाई की विधि
खेत की 2–3 बार अच्छी जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरी बना लें। आखिरी जुताई के समय गोबर की सड़ी हुई खाद (8–10 टन प्रति हेक्टेयर) मिला दें।
•बुवाई की दूरी: कतार से कतार की दूरी: 30–45 सेमी
पौधे से पौधे की दूरी: 10–15 सेमी
गहराई: 4–6 सेमी
सीड ड्रिल या हाथ से कतारों में बुवाई करना बेहतर रहता है।
सिंचाई और खाद प्रबंधन
खरीफ फसल में बारिश पर निर्भरता अधिक होती है, लेकिन लंबे समय तक सूखा पड़ने पर हल्की सिंचाई जरूरी है।रबी फसल में 3–4 सिंचाइयाँ पर्याप्त रहती हैं – फूल आने, फली बनने और दाने भरने के समय।
*उर्वरक मात्रा (प्रति हेक्टेयर): नाइट्रोजन: 20–25 किग्रा
•फास्फोरस: 40–60 किग्रा
पोटाश: 40 किग्रा जिप्सम का प्रयोग फूल आने के समय करने से फलियों का विकास अच्छा होता है।
खरपतवार और रोग नियंत्रण
बुवाई के 20–25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करें। आवश्यकता पड़ने पर 40–45 दिन बाद दूसरी निराई करें।खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमेथालिन का छिड़काव भी किया जा सकता है।
*मुख्य रोग: टिक्का रोग, पत्ती धब्बा, जड़ सड़न
•इनसे बचाव के लिए समय-समय पर फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
फसल की कटाई और उत्पादन
मूंगफली की फसल सामान्यतः 100–120 दिनों में तैयार हो जाती है। जब पत्तियां पीली पड़ने लगें और फलियों का अंदरूनी भाग कठोर हो जाए, तब कटाई का सही समय होता है।कटाई के बाद पौधों को 2–3 दिन धूप में सुखाएं, फिर फलियों को अलग करें। अच्छी तरह सूखाने के बाद भंडारण करें।औसत उत्पादन: 15–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (उन्नत तकनीक से 30 क्विंटल तक)
लागत और मुनाफा
मूंगफली की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम होती है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। तेल मिलों, नमकीन उद्योग और घरेलू उपयोग के कारण किसान को अच्छा दाम मिल सकता है। सही प्रबंधन से किसान प्रति हेक्टेयर 40,000 से 80,000 रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं (क्षेत्र और बाजार भाव के अनुसार)।
निष्कर्ष
अगर आप कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने वाली फसल की तलाश में हैं, तो मूंगफली की खेती एक बेहतरीन विकल्प है। सही समय पर बुवाई, उन्नत बीज, संतुलित खाद और नियमित देखभाल से आप बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। वैज्ञानिक तरीके अपनाकर और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती करें, तो मूंगफली आपकी आय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
